‘आप’ ने 1984 कत्लेआम के आरोपी कमल नाथ को लेकर कांग्रेस को घेरा

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आम आदमी पार्टी (आप) पंजाब ने 1984 में सिक्ख कत्लेआम के आरोपी कमल नाथ के सिर पर कांग्रेस की तरफ से ‘मुख्य मंत्री का ताज’ रखे जाने की तैयारी का जोरदार विरोध करते हुए आरोपी लगाया है कि कांग्रेस पीडि़त सिक्ख परिवारों को इंसाफ देने की बजाए बार-बार जख्मों पर नमक छिडक़ रही है।
‘आप’ मुख्य दफ्तर द्वारा जारी ब्यान में विरोधी पक्ष के नेता हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि कमल नाथ 1984 के सिक्ख विरोधी दंगों में शामिल था। नानावती कमीशन समेत मीडिया और दो न्यायिक जांच में कमल नाथ की स्पष्ट भागीदारी तथ्यों-सबूतों सहित सामने आई है, परंतु न तो कांग्रेस और न ही केंद्र में करीब 10 वर्ष सत्ता का सुख भोगने वाली भाजपा-अकाली दल की सरकार ने कमल नाथ को हिम्मत दिखाई। उल्टा कांग्रेस की तरफ से सज्जण कुमार और जगदीश टाइटलर की तरह कमल नाथ को बड़े-बड़े रुतबों के साथ मान-सम्मान देकर सिक्खों समेत समूचे इंसाफ पसंद लोगों का बार-बार मुंह चिड़ाया जा रहा है।
हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि नानावती कमीशन की रिपोर्ट में स्पष्ट दर्ज है कि पहली नवंबर 1984 को कमल नाथ उन 4000 लोगों की हमलावर भीड़ का नेतृत्व कर रहा था, जिस ने गुरुद्वारा श्री रकाबगंज पर हमला कर आगजनी की और निर्दोष लोगों की जान ली। चीमा ने कहा कि नानावती कमीशन ने अपनी अंतिम रिपोर्ट में कमल नाथ को कालिन चिट्ट नहीं दी। यहां तक कि प्रसिद्ध पत्रकार संजय सूरी ने जहां नानावती कमीशन के पास कमल नाथ की सिक्ख विरोधी दंगों में भागीदारी की बात कही वहीं सूरी ने मिश्रा कमीशन के पास हलफीया बयान दे कर कमल नाथ पर अपने आरोपों को दोहराया। मौके के गवाह और पीडित मुख्तियार सिंह ने भी यही आरोप लगाए कि कमल नाथ हमलावर भीड़ का नेतृत्व और निर्देश दे रहा था। यहां तक कि 2 नवंबर 1984 को अंग्रेजी के एक बड़े अखबार में खबर छपी थी जिस में कमल नाथ की वहां 2 घंटे मौजूदगी बताई गई। इन सबूतों-तथ्यों के आधार पर कमल नाथ की तरफ से 20 साल बाद दी गई सफाई को रद्द कर दिया है।
हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि बावजूद इसके कांग्रेस कमल नाथ जैसे दागी नेताओं को एक से बढ़ कर एक सम्मान दे रही है। आम आदमी पार्टी इस की निंदा और विरोध करती है। चीमा ने कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रधान राहुल गांधी से मांग की कि कमल नाथ को मुख्य मंत्री न बनाए। चीमा ने प्रधान मंत्री नरिंदर मोदी से अपील की है कि वह बिना किसी देरी के कमल नाथ के विरुद्ध केस री-ओपन कर समयबद्ध जांच करवाएं जिससे आरोपी को बनती सजा और पीडितों को इंसाफ मिल सके।
हरपाल सिंह चीमा ने पंजाब के मुख्य मंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह और पंजाब कांग्रेस प्रधान सुनील जाखड़ से भी स्पष्टीकरण मांगा और यह भी स्पष्टीकरण मांगा गया कि यदि कमल नाथ सचमुच पाक-साफ हैं तो कांग्रेस 2016 में कमल नाथ को पंजाब का इंचार्ज बनाऐ जाने का फैसला वापस क्यों लिया था?


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