किसानों के हक में सडक़ों से लेकर सदन तक घेरेंगे सरकार-आप

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गन्ने के निर्धारित किए गए मूल्य में 35 रुपए प्रति क्विंटल की कटौती पर अड़ी राज्यों की प्राईवेट शुगर मिल्स के विरुद्ध आम आदमी पार्टी (आप) का वफद मंगलवार को पंजाब के राज्यपाल माननीय वी.पी सिंह बदनौर को मिला। विरोधी पक्ष के नेता हरपाल सिंह चीमा के नेतृत्व में ‘आप’ वफद ने मांग की है कि वह (राज्यपाल) कैप्टन अमरिन्दर सिंह सरकार पर निजी शुगर मिल मालिकों की बजाए गन्ना उत्पादकों के हकों को सुरक्षित करने के लिए कानूनन दबाव बनाएं। इस सम्बन्धित ‘आप’ वफद ने गन्ना उत्पादकों का मानसिक और आर्थिक शोषण रोकने के लिए राज्यपाल को मांग पत्र सौंपा।
इस उपरांत मीडिया के रू-ब-रू होते हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि कैप्टन सरकार भी पिछली बादल सरकार की तरह किसानों की कुर्बानी देकर प्राईवेट शुगर मिल माफिया के हितों की पूर्ति कर रही है, क्योंकि प्राईवेट शुगर मिल्स कांग्रेस और अकाली नेताओं की हैं। चीमा ने कहा कि जब तक सरकार गन्ना उत्पादक किसानों के हित सुरक्षित करने के लिए निजी शुगर मिल्स को सख्त नियम-कानून के अधीन नहीं लाती और सहकारी शुगर मिल्स को हर स्तर पर मजबूत नहीं करती तब तक न तो निजी शुगर मिल माफिया का एकाधिकार टूटेगा और न ही किसानों का शोषण बंद होगा। उन्होंने कहा कि ‘आप’ इन किसानों के हक के लिए सडक़ों पर लड़ाई लड़ रही है और आगामी विधान सभा सैशन दौरान सदन में भी लड़ेगी और जरूरत पडऩे पर अदालत का दरवाजा तक भी खटखटाने से गुरेज नहीं करेगी।
‘आप’ के मांग पत्र में पंजाब में सभी फुटकल खेती खर्च दूसरे राज्यों की अपेक्षा अधिक हैं और किसानों की फसली लागत ज़्यादा है, इस लिए गन्ने की एस.ए.पी प्रति क्विंटल 350 रुपए की जाए।
पंजाब की सभी सरकारी और सहकारी शुगर मिल्ल को राज्य सरकार की ओर से निर्धारित किए गए एस.ए.पी. मूल्य के लिए पाबंद किया जाए।
प्राईवेट शुगर मिल्ल राज्यों का 70 प्रतिश्त गन्ना पिराई कर रही है। इनका एकाधिकार खत्म करने के लिए सहकारी शुगर मिल्स की समर्था में विस्तार और अपग्रेडेशन की जाए।
शुगर मिल्स को गन्ने के क्षेत्रफल के साथ कानूनी तौर पर बाउंड कर किसानों को पर्ची माफिया से निजात दी जाए।
गन्ना उत्पादकों का लगभग 417 करोड़ रुपए का बकाया पिछले लम्बे समय से मिल्स की तरफ खडा है। जिस में करीब 225 करोड़ प्राईवेट मिल मालिकों की तरफ है। इस का ब्याज समेत तुरंत भुगतान करवाया जाए।
शूगरकेन एक्ट में जरूरी शंसोधन किए जाए, जिससे मिल मालिकों की तानाशाही और मनमर्जी को कानूनी तौर पर नकेल कसी जा सके। 
गन्ने की राशि का भुगतान 15 दिनों के अंदर-अंदर यकीनी बनाया जाए। देरी की सूरत में ब्याज समेत भुगतान कानूनी दायरे में लाया जाए।
क्रशिंग (पिराई) सीजन समाप्त होने के एक महीने के अंदर-अंदर किसानों को एडीशनल रिकवरी प्राइज का भुगतान यकीनी बनाया जाए।
शुगर मिल्स खास कर प्राईवेट शुगर मिल्स की पिराई के लिए निर्धारित तिथि सख्ती के साथ लागू की जाए। ऐसा न करने वाली निजी मिल्स के लाइसैंस रद्द किए जाएं।
इस मौके हरपाल सिंह चीमा, प्रिंसिपल बुद्ध राम, प्रो. साधू सिंह एम.पी, डा. बलबीर सिंह, सरबजीत कौर माणूंके, अमन अरोड़ा, प्रो. बलजिन्दर कौर, रुपिन्दर कौर रूबी, मनजीत सिंह बिलासपुर, अमरजीत सिंह सन्दोआ, कुलवंत सिंह पंडौरी, कुलदीप सिंह धालीवाल, नरिन्दर सिंह शेरगिल, डा. रवजोत सिंह, दलबीर सिंह ढिल्लों, गुरदित्त सिंह सेखों, जमील-उर-रहमान, सुखविन्दर सुखी, मनजीत सिंह सिद्धू, शैरी कलसी और डा. के.वी सिंह शामिल थे।


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