नेता विपक्ष की तरफ से किसानो के लिए संघर्ष का एलान

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आम आदमी पार्टी (आप) पंजाब द्वारा सरकार की सरपरस्ती पर गन्ना उत्पादकों को ब्लैकमेल कर रहे प्राईवेट शुगर मिल माफिया के विरुद्ध सडक़ों पर उतरने के साथ-साथ मंगलवार 4 दिसंबर को पंजाब के राज्यपाल माननीय वी.पी. सिंह बदनौर के साथ मुलाकात करेगी।
‘आप’ मुख्य दफ्तर द्वारा जारी बयान में विरोधी पक्ष के नेता हरपाल सिंह चीमा ने बताया कि गन्ना उत्पादकों को स्टेट एडवाइजरी प्राइस (एसएपी) की ओर से चालू सीजन के लिए निर्धारित 310 रुपए प्रति क्विंटल मूल्य यकीनी बनाने के लिए पार्टी माननीय राज्यपाल के द्वारा कैप्टन अमरिन्दर सिंह सरकार पर दबाव बनाया जाएगा। 
चीमा ने आरोप लगाया कि पिछली बादल सरकार की तरह कैप्टन अमरिन्दर सिंह भी प्राईवेट शुगर मिल प्रबंधकों के समक्ष घुटने टेक दिए हैं, क्योंकि फगवाड़ा शुगर मिल के मालिक जरनैल सिंह वाहद बादल परिवार के बेहद करीबी अकाली नेता और पंजाब प्राईवेट शुगर मिल एसोसिएशन के प्रधान हैं। इसी तरह बुट्टर शुगर मिल के मालिक राणा गुरजीत सिंह कैप्टन अमरिन्दर सिंह के अति करीबी कांग्रेसी विधायक हैं। मुकेरियां और कीड़ी अफगाना शुगर मिल्स के मालिक कैप्टन अमरिन्दर सिंह के सलाहकार परमजीत सिंह सरना के करीबी रिश्तेदार होने के साथ-साथ कैप्टन अमरिन्दर सिंह के सीधे तौर पर करीब हैं। दसूहा शुगर मिल के मालिक डी.पी. यादव यू.पी. के राजनीतिज्ञ और बादलों व कैप्टन दोनों के करीबी हैं। 
चीमा ने कहा कि बतौर मुख्य मंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह को धनाढ्य शुगर मिल मालिकों की बजाए राज्यों के किसानों के हितों में डटना चाहिए। प्राईवेट शुगर मिल मालिकों के 70 प्रतिश्त एकाधिकार को तोडऩे के लिए राज्यों की 7 सहकारी मिल्स की समर्था बढ़ाने और वित्तीय ‘तौर पर मजबूत करना चाहिए और सहकारी मिल्स और गन्ना उत्पादकों का 192 करोड़ रुपए का बकाया तुरंत जारी किया जाए। चीमा ने बताया कि किसानों का कुल 417 करोड़ रुपए बकाया बाकी है, जिस में से 225 करोड़ रुपए प्राईवेट शुगर मिल्स का है। 
हरपाल सिंह चीमा ने गन्ना का केंद्र सरकार की तरफ से निर्धारित 275 रुपए प्रति क्विंटल मिनिमम स्टेचूरी प्राईज (एमएसपी) को पंजाब के लागत खर्चे के मुकाबले पूरी तरह रद्द कर दिया। उन्होंने कहा कि यदि कैप्टन सरकार राज्यों के किसानों प्रति सचमुच चिंतत है तो गन्ने का एमएसपी प्रति क्विंटल 350 रुपए निर्धारित किया जाए, जो अब 310 रुपए प्रति क्विंटल है और प्राईवेट शुगर मिल्स यह देने से भी भाग रही हैं और सरकारी सरपरस्ती के चलते पिराई न करने की बात पर अड़ी हुई हैं। 
चीमा ने कहा कि आम आदमी पार्टी गन्ना उत्पादकों को न सिर्फ शुगर केन एक्ट अधीन शुगर केन कंट्रोल बोर्ड की सिफारिश पर राज्य सरकार की तरफ से निर्धारित 310 रुपए प्रति क्विंटल मूल्य यकीनी बनाने के लिए सडक़ से ले कर सदन तक निर्णायक लड़ाई लड़ेगी बल्कि गन्ना उत्पादकों के लिए एडीशनल रिकवरी प्राईज की लड़ाई भी लड़ेगी, क्योंकि गन्ने की एमएसपी प्रीत क्विंटल गन्ने से साढ़े 8 किलोग्राम चीनी बनने के मापदंड अनुसार निर्धारित की जाती है। शूगर केन एक्ट में किसानों के हित सुरक्षित करने के लिए स्पष्ट मद है कि यदि सीजन दौरान चीनी की रिकवरी निर्धारित पैमाने से अधिक होती है तो मिल मालिक अधिक पैदा हुई चीनी का हिस्सा एडीशनल रिकवरी प्राईज के तौर पर किसानों को फालतू मूल्य देगा, 1990 के दशक में किसान ऐसा लाभ ले चुके हैं, परंतु उस उपरांत शुगर मिल्स और सरकारी मिलीभुगत ने किसानों को इस फालतू मूल्य के लाभ से वंचित कर दिया है, जबकि रिकवरी 8.50 किलोग्राम औसत की बजाए 9.50 किलोग्राम से कभी भी कम नहीं रही।

चीमा ने कहा कि गन्ना उत्पादक एडीशनल रिकवरी प्राईज दिलाने के लिए अदालत तक का दरवाजा खटका सकती है। चीमा ने अकाली दल की तरफ से गन्ना उत्पादकों के लिए दिए जा रहे बयानों को केवल ड्रामेबाजी करार देते हुए कहा कि वह जरनैल सिंह वाहद के दफ्तर का घेराव करेंगे वहीं उन्होंने कहा कि किसानों के करोड़ों रुपए दबाए बैठे फगवाड़ा शुगर मिल मालिक को अपनी पार्टी से निकालें। उन्होंने कहा कि ‘आप’ जरनैल सिंह वाहद के दफ्तर समेत बाकी प्राईवेट मिल मालिकों के दफ्तरों, घरों या मिल्स घेराव करेगी।


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